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12 October 2025

अपना कोहि नहिं होता हे

सिखो अपनो से
सपने तो हर कोहि देख सकते हैं
ईश संसारमे कोहि अपना नहिं होता हे,
खुदका लास भि छोडकर जाना पडता हे।

01 August 2018

डाक्टर और मरीज

मरीज: अरे डाक्टर साब! हमने शुबहसे कुच्छो नहि खाया, बहुते भुख लगरहा हे हमको जल्दी करवा दिजिए ना।
डाक्टर: आपको हमे भुखे रहने को कहा ता? काना काके आना।
मरीज: अरे हम कहाँ जाएं, हमतो बुहुते दूर थहरते हें। हमार लाज दूर हे।
डाक्टर: आपको हमे गर जानेको कहा ? केन्टीन पे जाकर का के आना, लाइन पे आना।
मरीज: अरे वाह! कन्टीनवामे थोडी फोकटमे मिलतबा? पैसवा कौन भरत बा? तुम्हारा बाप? (मन हि मन झगडकर मरीज बाहर निकला)

(डाक्टर साब तमिल, मरीज बिहारी था)
स्थान: भेलोर, CMC Hospital